करैरा क्षेत्र में चल रहा रेत का अवैध कारोबार* *??अबैध रेत को रोक पाने में क्यों असमर्थ हो रहा है प्रशासन..???*

*अखिलेश दुबे* *(पत्रकार)*

*शिवपूरी….. करैरा क्षेत्र में इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा रेत का अवैध उत्तखनन कारोबार आखिर क्यों रुक नही पा रहा है ..???आखिर रेत माफिया के सामने क्यों नतमस्तक हो जाता है प्रशासन ..???या फिर रेत माफिया के रसूख के चलते कार्यवाही करने में असमर्थ बना हुआ है ..??? यह कुछ सवाल हैं जो जन मानस में उठाये जा रहे हैं।* *गौर तलब है कि सरकार द्वारा अवैध उत्खनन को रोकने की मंशा से कानून बना कर नदीओं में मशीन से उत्खनन किये जाने को पूर्णत: प्रतिबंधित किया गया किन्तु देखने में आ रहा है कि रेत माफिया को अपने* *राजनैतिक रसूख के चलते कानून का जरा भी भय नही और खुलकर मशीनों का उपयोग कर दिन रात अवैध उत्खनन किया जा रहा है ।ऐसा नही कि प्रशासन को इन सब की जानकारी नही बल्कि सच तो यह है कि जानकर भी प्रशासन अनदेखा कर रहा है* *यह अलग बात है कि प्रशासन के नुमाइंदों के नजर अंदाज किये जाने की वजह जो भी हो रेत माफिया से सांठगांठ अथवा उनका राजनैतिक रसूख ।पर यह भी कटु सत्य है कि करेरा क्षेत्र में रेत का अवैध उत्खनन निर्वाध रुप से बिना रोक टोक के संचालित बना हुआ है* *जिसमें नगर के कुछ कलमकार तथा कुछ सत्ता पक्ष के छुटभैये नेता भी शामिल हैं।जिनके द्वारा करेरा के आसपास महुअर नदी से रेत का उत्खनन कर अपनी जेबे गरम की जा रहीं हैं।करैरा क्षेत्र में संचालित अवैध रेत खदानें जहाँ से रेत माफीयाओं द्वारा बड़े पैमाने पर अबैध रेत उत्खनन किया जा रहा है* *चितारी कल्याणपुर .बीजोर पुलहा कालीपहाड़ी धवारा अमोलपठा राजगढ़ परागड सिलानगर सिरसोना टोड़ा सिल्लारपुर कलोथरा डुमघना लालपुर नारही घसारी झंडा सम्मोहा चंदपठा बगेधरी अब्बल कुचलोन कुम्हरौआ बमहारी आदि रेत खदानें प्रमुख है।*
*सूत्रों की मानें तो प्रशासन द्वारा सिर्फ उन स्थानों पर ही दबिश देकर कार्यवाही को अंजाम दिया जाता है जहाँ उनकी सेटिंग नहीं हो पाती या फिर पहले वाले से अधिक देने वाला कोई नया माफिया मिल जाता है जिसके इशारे पर फिर प्रशासन द्वारा कार्यवाही की जाती है।यही स्थिति यहाँ कुछ तथाकथित कलमकारों की भी है जिनके द्वारा पहले तो रेत माफिया पर दबाब बनाया जाता है तथा रेत माफिया के उनके दबाब में न आने की स्थिति में ही उनके द्वारा प्रशासन पर कार्यवाही के लिये दबाब बनाना शुरू कर दिया जाता है और तब तक लगे रहते है जब तक की प्रशासन कार्यबाही करने को मजबूर नहीं हो जाता । बस इसी वह अपनी धांक जमा कर बसूली शुरू कर देते है।✍?*

Durgesh Gupta

Chief Editor

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