किसी परेशानी के कारण बैंक लोन नहीं चुका पा रहे , तो जानिए अपने 5 अधिकार

किसी परेशानी के कारण बैंक लोन नहीं चुका पा रहे , तो जानिए अपने 5 अधिकार

अपने बैंक से लोन लिया है और आप पर अचानक कोई विपत्ति आगई जिससे आप बैंक लोन चुकाने में नाकाम रहते है तो बैंक अपनी मर्जी से आपके साथ कुछ भी नहीं कर सकता है ! बैंक को पैसा बसूल करने का अधिकार है लेकिन उसे एक प्रक्रिया का पालन करना होता है ! ऐसी स्थति के क्या है वह प्रक्रिया जानने के लिए पूरा पढ़े !
आइये जानते है लोन चुकाने में असफल रहने वाले लोगो के पास क्या अधिकार होते है !

१- नोटिस का अधिकार
अगर आप लोन चुकाने में असफल होते है तो ऐसा नहीं है की सारे अधिकार छीन लिए गए हो ! बैंक को अपनी बकाया राशि की बसूली के लिए आपकी सम्पत्ति पर कब्जा जमाने से पहले बैंक इस तरह की कार्रवाई सिक्यॉरिटाइजेशन ऐंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनैंशल ऐसेट्स ऐंड एंफोर्समेंट ऑफ सिक्यॉरिटी एंट्रेस्ट (सारफेसी) ऐक्ट के तहत करते हैं। अगर कर्जदार के खाते को नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट्स (एनपीए) में डाल दिया गया है और 90 दिनों से बकाया का भुगतान नहीं किया गया है तो पहले बैंक को 60 दिनों का एक नोटिस जारी करना पड़ता है।
बैंकिंग और मैनेजमेंट कंसल्टेंट वी.एन.कुलकर्णी ने बताया, ‘अगर कर्जदार नोटिस पीरियड के दौरान पैसा देने में नाकाम रहता है तो बैंक उसकी संपत्तियों की नीलामी कर सकता है। लेकिन नीलामी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बैंक को एक बार फिर 30 दिनों की पब्लिक नोटिस देनी होती है जिसमें नीलामी के विवरण का उल्लेख जरूरी होता है।’बैंक को प्रक्रियाओ का पालन करना पड़ता है !और बकाया चुकाने के लिए आपको समय देना होता है !

२-उचित मूल्य का अधिकार

अगर आप 60 दिनों की अवधि के अंदर लोन चुकाने में असफल रहते हैं तो बैंक आपकी संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। लेकिन ऐसा करने से पहले बैंक को एक और नोटिस देना होता है। इस नोटिस में बैंक आपकी संपत्ति की बैंक के वैल्यूअर्स द्वारा तय की गई कीमत, रिजर्व प्राइस, नीलामी की तारीख और समय के बारे में जानकारी देता है।
कुलकर्णी ने बताया, ‘अगर कर्जदार को लगता है कि उसकी संपत्ति की कीमत कम लगाई गई है तो वह आपत्ति दर्ज करा सकता है। वह इसको सही ठहराने के लिए ऐसे किसी ऑफर का हवाला दे सकता है, जो उसे मिला हो। इस पर गौर करने के बाद बैंक फैसला ले सकता है।’

३-सम्पत्ति की नीलामी में बांकी रकम का अधिकार
बैंक के कब्जे में जाने के बाद भी संपत्ति पूरी तरह आपके हाथ से निकल नहीं जाती है। अगर संपत्ति की नीलामी की रकम लोन और सारी प्रक्रिया पर होने वाले खर्च से ज्यादा है तो बाकी रकम पाने का आपको अधिकार है। इसको ऐसे समझ सकते हैं कि मान लीजिए बैंक का आप पर कुल 50 करोड़ बकाया है। नीलामी और अन्य प्रक्रिया में 1 करोड़ रुपये खर्च होता है। दोनों को मिलाकर कुल 51 करोड़ हो गया। अगर जमीन 60 करोड़ में बिकती है तो बाकी का 9 करोड़ रुपये आपको वापस किया जाएगा।

४-सुने जाने का अधिकार

नोटिस पीरियड के दौरान आप अथॉराइज्ड अधिकारी के सामने अपनी बात रख सकते हैं और संपत्ति को जब्त करने के नोटिस पर अपनी आपत्ति जता सकते हैं। कुलकर्णी ने बताया, ‘अधिकारी को सात दिनों के अंदर जवाब देना होगा। अगर आपकी आपत्तियों को वह खारिज करता है तो इसके वैध कारण भी बताने होंगे।’

५-मानवीय व्यवहार का अधिकार

 

रिकवरी एजेंट्स के खराब व्यवहार का मामला सामने आने पर आरबीआई ने बैंकों की खिंचाई की। बैंक ने भी स्वेच्छा से बेहतरीन व्यवहार करने का फैसला लिया।
एजेंट्स किसी कर्जदार से उसी स्थान पर मिलेगा, जिसे कर्जदार खुद चुनेगा। अगर उसका कोई निश्चित स्थान नहीं है तो एजेंट्स कर्जदार के निवास स्थान या कार्य स्थल पर जाकर उससे मिल सकते हैं। उनको कर्जदार की निजता का सम्मान करना होगा और सही व्यवहार करना होगा। वे सुबह 7 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक ही कॉल कर सकते हैं। एजेंट्स न तो कर्जदार या उसके परिवार को प्रताड़ित कर सकता है और न धमकी दे सकता है औ न ही अपमान कर सकता

Durgesh Gupta

Chief Editor

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