छितीपुर मे चल रही भागवत कथा के चौथे दिन क्रष्ण जन्म की कथा मे उमडा श्रध्दालूओ का जनसैलाब*

*नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की*

*छितीपुर मे चल रही भागवत कथा के चौथे दिन क्रष्ण जन्म की कथा मे उमडा श्रध्दालूओ का जनसैलाब

शिवपुरी- हिम्मतपुर से दो किलोमीटर दूर दिनारा क्षेत्र के अंंतर्गत ग्राम छितीपुर मे गौड़ बाबा मंदिर पर श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया रहा है जिसमें मुख्य यजमान श्री मती भुअन रबि लोधी आयोजक समस्त छितीपुर बासी भागवत पाठ कर्ता पं.श्री मनी महाराज कुचलौन यज्ञचाय॔ पं.श्री रामनिबास व्यास जी महाराज भागवत कथा मे आज चौथे दिन की कथा में दतिया से पधारी बाल संत कुमारी ज्योती भारती जी ने श्री कृष्ण के जन्म का वर्णन करते हुए कहा भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है और सारे देश में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है।

‘द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। उसके आततायी पुत्र कंस ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ था

एक समय कंस अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था।
रास्ते में आकाशवाणी हुई- ‘हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल बसता है। इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा वध करेगा।’ यह सुनकर कंस वसुदेव को मारने के लिए उद्यत हुआ।
तब देवकी ने उससे विनयपूर्वक कहा- ‘मेरे गर्भ से जो संतान होगी, उसे मैं तुम्हारे सामने ला दूंगी। बहनोई को मारने से क्या लाभ हैकंस ने देवकी की बात मान ली और मथुरा वापस चला आया। उसने वसुदेव और देवकी को कारागृह में डाल दिया।
वसुदेव-देवकी के एक-एक करके सात बच्चे हुए और सातों को जन्म लेते ही कंस ने मार डाला। अब आठवां बच्चा होने वाला था। कारागार में उन पर कड़े पहरे बैठा दिए गए। उसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था।
उन्होंने वसुदेव-देवकी के दुखी जीवन को देख आठवें बच्चे की रक्षा का उपाय रचा। जिस समय वसुदेव-देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो और कुछ नहीं सिर्फ ‘माया’ थी।और श्री कृष्ण जी का जन्म बड़ी धूमधाम से मनाया गया

Durgesh Gupta

Chief Editor

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