जिले में सीमांकन और फर्जी नामांतरण बनी बड़ी समस्या

जिले में सीमांकन और फर्जी नामांतरण बनी बड़ी समस्या
बिना रजिस्ट्रि और आदेश के अन्य के नाम कर दिया जाता है नामांतरण
न्याय के लिए तहसील के चक्कर काट रहे हैं भूमीस्वामी
शिवपुरी। पूरे जिले भर में सीमांकन और नामांतरण में फर्जीवाड़ा अब लोगों की परेशानी का सबब बना हुआ है, कई बार ऐसा देखने में आया है कि भूमी स्वामी होने के बाद भी उसकी जमीन पर कागजों में किसी और का नाम बिना किसी रजिस्ट्रि और नामांतरण के इंद्राज कर दिया जाता है उसके बाद भूमीस्वामी को तहसील के चक्कर काटने पड़ते हैं कभी न्याय मिलता है तो कभी वह पूरी तरह अन्याय का सिकार भी हो जाता है,तहसील कार्यालय में सीमांकन जैसी प्रक्रिया जिससे जमीन के असली मालिक के पता लगने के साथ ही कब्जा हटाने को लेकर भी तहसील कार्यालय का रवैया उदासीन है एैसे कई उदाहरण है जिनमें लोग इन समस्याओं से जूझ रहे हैं,एैसे ही कुछ मामले आपके समक्ष रखे जा रहे हैं जो विचारणीय हैं। एक मामला गढ़ी बरौद का सामने आया है जिसमें पटवारी द्वारा अपनी मनमानी करते हुए दूसरे के नाम जमीन चढ़ा दी अब भूमिस्वामी होने के बाद भी वह दर-दर भटकने का मजबूर है। एक व्यक्ति द्वारा जिला कलेक्टर को आवेदन देकर उसकी जमीन पर दूसरे के नामांतरण की शिकायत की गई है वह भी बिना किसी आदेश या रजिस्ट्री के। आवेदन में फरियादी सीताराम पुत्र उमराव किरार ने बताया है कि पटवारी हल्का नंबर 76 में सर्वे नंबर 1310 पर उसकी 1.680 हेक्टेयर जमीन है जिसकी रिण पुस्तिका सीताराम के पास है सीताराम के अनुसार उसने यह जमीन किसी को भी विक्रय नहीं की है। लेकिन बीते वर्ष 2016 में वह अपनी भूमी जोतने को गया तो वहां शिवचरण पुत्र चुन्नीलाल किरार ने उसे भूमी जोतने से मना कर दिया और कहा कि यह भूमी मेरी है और मेरे नाम है और वहां से जान से मारने की धमकी देते हुए सीताराम को वहां से भगा दिया। सीताराम का कहना है कि यह जमीन उसने 1984 में गुरूदेव पुत्र केयरसिंह सिख से खरीदी थी और 2016 से पहले तक उसने उसपर खेती भी की। सीताराम ने जिला कलेक्टर के नाम आवेदन देकर उक्त जमीन पर कब्जा दिलाये जाने की गुहार लगाई है। सीताराम ने बताया कि तत्समय तहसीलदार ने उसका नाम यथावत करने के आदेश दिये जिसके पश्चात एसडीएम द्वारा अपने प्रकरण में इस धोखाधड़ी को न देखते हुए अवैध आदेश पारित किया और शिवचरण का नाम पुन: स्थापित करने के आदेश दिये जिसमें अपील करने पर अपर आयुक्त ने 28 जून 2018 को उसके पक्ष में आदेश पारित किया। सीताराम ने यह भी बताया कि हल्का नंबर 76 के पटवारी रघुवीर शर्मा के साथ मिलकर यह धोखाधड़ी की गई है।

Durgesh Gupta

Chief Editor

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