ढाई वर्ष बाद परिवार से मिला बबलू

विकाश क्रांति की सामाजिक सरोकार की पहल लाई रंग

करैरा शिवपूरी…ढाई साल पहले अपने परिवार से जुदा हुए बबलू उर्फ लोकनाथ तिवारी पिता भगवतराम तिवारी ग्राम चौरसिया जिला गोंडा उत्तर प्रदेश आज फिर अपने परिजनों से मिल ही गया मिलन की इस प्रक्रिया में अहम भूमिका अदा की करेरा विकास क्रन्ति की टीम ने जिसने सोशल मीडिया के सहारे बबलू के परिजनों को ढूढ़ निकाला और बबलू को आज उनसे मिल भी दिया सामाजिक सरोकार के क्षेत्र में विकास क्रांति की यह पहल एक मिशाल बन गई है।
बबलू किसी प्रकार भटक कर अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर 8 दिन पूर्व करैरा जिला शिवपुरी के उत्कृष्ट विद्यालय के मैदान के पास मरणासन्न स्थिति में विकास क्रांति के विनय मिश्रा को मिला तो इसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी लेकिन पुलिस ने सिर्फ़ फ़ोटो क्लिक किया ओर चली गई।लेकिन करैरा विकास क्रांति समाज सेवी संस्था समाज सेवा के सदस्यों ने अपनी लगन व मेहनत के दम पर व्हाट्सएप और फेसबुक पर लोगों से संपर्क साधा तो पता चला कि बबलू गोंडा उत्तर प्रदेश का रहने वाला है।लगतार कई दिनों तक भूख प्यास के कारण बबलू मानसिक रूप से इतना बीमार हो गया था कि उसे ठीक से कुछ याद नहीं आ रहा था लेकिन जैसे ही उसको विकास क्रांति के स्वम सेवकों ने खाना पीना के साथ साथ उचित इलाज भी देना शुरू किया तो वह धीरे धीरे बोलने लगा और बड़े प्रयासों से उनसे अपना नाम लोकनाथ तिवारी व पिता भगतराम तिवारी, माँ का नाम अन्ना तिवारी एक भाई छोटा रवि तिवारी, दो बहनें सुनीता और कुंती जिला गोंडा उत्तर प्रदेश बताया।और कहा कि माँ के पास जाना है। तुरंत ही विकाशक्रान्ति के एक स्वयंसेवक ने गोंडा DM के कार्यालय की ईमेल पता इंटरनेट से निकाल कर फ़ोटो और पूरी डिटेल मेल की दूसरे दिन DM कार्यालय से स्टेनो द्वारा करैरा संपर्क साधा और हर संभव मदद का आस्वासन दिया तथा उन्होंने भी अपने क्षेत्र में इस संदेश को फैलाने शुरू कर दिया तभी यह संदेश गोंडा जिले के शासकीय शिक्षक
विवेक पचौरी जी को मिला तो उन्होंने चौरसिया गांव पहुँचकर उनके घर तक यह संदेश पहुँचाया व पचौरी जी द्वारा बबलू के छोटे भाई रवि और बबलू के पिता श्री भगतराम तिवारी जी का फोटो करैरा व्हाट्सएप पर भेजा जिसे देख कर बबलू ने तुरंत ही पहचान लिया और कहा कि यह मेरा छोटा भाई रवि,यह मेरे पापा भगतराम तिवारी है इतना कहते ही उसकी आँखों मेसे आँशु निकल पड़े । बबलू के पिता कोलकाता में काम करते हैं और शेष परिवार चेन्नई में रहता है। बबलू की मौसी और मामा बनारस में थे जोकि करेरा के सबसे नजदीक थे बाकी के सब परिवार के लोग करेरा से बहुत दूर थे तो उन्होंने आश्वासन दिया कि हम जल्दी यहां से करेरा के लिए प्रस्थान करेंगे आज 20 मई को बबलू की मौसी और मामा एवं अन्य दोस्त लोग करैरा आए जहां बबलू ने अपनी मौसी और मामा को तुरंत पहचान लिया विकास क्रांति के कई संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे साथ ही हॉस्पिटल में उपस्थित सभी माताएं बहनों की आंखें नम होती चली गई थी इसके बाद स्वम सेवकों ने यहां के प्रसिद्ध बगीचा सरकार के मंदिर पर बबलू और उसके परिवार के लोगों को दर्शन कराया और हनुमानजी के सामने बबलू को उसके परिजनों को सौंप दिया। नवयुवकों द्वारा किए गए इस मानवता के महान कार्य की सराहना आज नगर सहित क्षेत्र का हर व्यक्ति कर रहा है।

Durgesh Gupta

Chief Editor

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