धूम धाम से मनाया गया भगवान महावीर का जन्मकल्याणक

जिनालयों में भगवान महावीर के अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन कार्यक्रमों की धूम रही।

शिवपुरी। गुरुवार को जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की 2617 वीं जन्म जयंती सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ धूम-धाम से मनाई गई। जैन अनुयायियों ने दिगंबर जैन मंदिरों में श्री जी का जलाभिषेक करने के बाद विधिवत पूजा अर्चना की।

इसके बाद चांदी के रथ में भगवान की शोभा यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गाजे-बाजे के साथ निकाली। इस अवसर पर परम पूज्य संत शिरोमणि दिगंबर जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के 50 वें मुनि दीक्षा स्वर्णिम संयमोत्सव वर्ष 2017-18 के पावन अवसर पर, पावन बर्षायोग 2017 के दौरान नवनिर्मित, संयम कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण, सकल दिगंबर जैन समाज शिवपुरी एवं पावन वर्षा योग समिति 2017 शिवपुरी द्वारा किया गया। शोभायात्रा का जगह जगह स्वागत किया गया

श्री चंद्रप्रभ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री चिंतामणि जैन नेे बताया कि भगवान महावीर के 2617 वें जन्म कल्याणक दिवस को सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा गौरव दिवस के रूप में मनाते हुए बैंड बाजों के साथ सुबह साढ़े नौ बजे भगवान महावीर की प्रतिमा को दिव्य मंत्रोच्चार से सुसज्जित रथ में विराजमान कराकर रथ यात्रा श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ हुई। रथयात्रा सदर बाजार होते हुए माधव चैक, अस्तपताल चैराहा, कस्टम गेट होती हुई पुनः श्री चंद्रप्रभ जिनालय पहुँची।

शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे चल रहे थे। महिलाएं मंगलगीत गा रहीं थीं। वहीं समाज के लोग जयकारे लगा रहे थे। जीव अकेला आया है जग में और अकेला जाएगा, जैसी करनी यहां करेगा, वैसा ही फल पाएगा। रथयात्रा में आगे बच्चे हाथों में पचरंगी धर्म ध्वज लिए चल रहे थे, तथा महिलाएं अहिंसात्मक स्लोगन लिखी तख्तियां साथ लेकर चल रही थी। जुलूस पर मुख्य बाजार में जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई। समाज के व्यक्तियों ने अपने अपने घरों व प्रतिष्ठानों के सामने श्रीजी की आरती उतारी। रथयात्रा समाप्ति के पश्चात श्री जी की बिशेष शांतिधारा की गई।

तत्पश्चात श्री चंद्रप्रभ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट के सौजन्य से सकल जैन समाज का वात्सल्य भोज का भी आयोजन किया गया जिसमें जैन समाज के विभिन्न सामाजिक संगठनों पुलक जन चेतना मंच, विमर्श जाग्रति मंच, मरूदेवी महिला मंडल, राजुल महिला मंडल, पुलक महिला जन जाग्रति मंच, विमर्श महिला जाग्रति मंच, राजकुमार जैन राजू, नरेन्द्र चैधरी, विमल जैन, वरूण जैन, दीपक जैन डिस्पोजल सहित विभिन्न संगठनों ने विभिन्न खाद्य सामग्रियों के स्टाॅल लगाकर अपनी सेवायें प्रदान कीं।_

श्री महावी जिनालय पर डाला गया भगवान का पालना

_भगवान महावीर स्वामी की जयंती को लेकर सुबह से ही महावीर जिनालय में खासा उत्साह था। प्रातःकाल भगवान महावीर का मंत्रोच्चार के साथ स्वर्ण कलशों से प्रासुक जल से कलशाभिषेक किया गया तथा भगवान की सामूहिक महाआरती की गई। तत्पश्चात अष्टद्रव्यों से पूजन बा.ब्र. धीरजभैया राहतगढ़ के निर्देशन में किया गया। साथ ही इस अवसर पर प्रतिकात्मक रूप से बालक वर्धमान के लिये पालना डाला गया जिसमें श्रद्धालुओं ने बालक वर्धमान को पालना झुलाकर अपने आप को धन्य किया।

प्रातःकाल महावीर जिनालय पर दिगम्बर जेन समाज के लिये स्वलपाहार की भी व्यवस्था की गई थी। रात्रि में सांगानेर से पधारे विद्वान पं. संजीव शास्त्री द्वारा अहिंसा के प्रेणता भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों, उपदेशों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेणना अपने प्रवचनों में दी।_

हुआ संयम कीर्ति स्तंभ का लोकापर्ण

महावीर जयंति के अवसर पर परम पूज्य संत शिरोमणि दिगंबर जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के 50 वें मुनि दीक्षा स्वर्णिम संयमोत्सव वर्ष 2017-18 के पावन अवसर पर सारे भारत में आचार्य विद्यासागर संयम कीर्ति स्तंभों की स्थापना की जा रही है,

इसी तारतम्य में शिवपुरी में भी स्थानिय 14 नं. कोठी मिर्ची मार्केट में एक संयम कीर्ति स्तंभ की स्थापना सकल दिगम्बर जैन समाज एवं पावन बर्षायोग समिति 2017 के द्वारा की गई है। इस नवनिर्मित, संयम कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण, सकल दिगंबर जैन समाज शिवपुरी एवं पावन वर्षा योग समिति 2017 शिवपुरी द्वारा आज किया गया।_

हर साल दुनिया भर में पूरे हर्षोल्लास के साथ जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जयंती मनाई जाती है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार अहिंसा, त्याग और तपस्या का संदेश देने वाले भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की 13वीं तिथि को हुआ था। इसी वजह से जैन धर्म को मानने वाले इस दिन को महावीर जयंती के रूप में मनाते हैं।

जैन धर्म के अनुयायियों के लिए महावीर जयंती का विशेष महत्व है। यह उनके प्रमुख त्योहारों में से एक है। न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी जैन समुदाय का विस्तार है और सभी लोग साल भर इस दिन का इंतजार करते हैं।_

श्री चिंतामणि जैन (अध्यक्ष श्री चंद्रप्रभ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट )

भगवान महावीर ने आज के दिन जन्म लेकर जीवों को अहिंसा, स्याद्वाद और अपरिग्रह का संदेश दिया। भगवान महावीर ने हमें सिखाया कि जीवों की रक्षा कर लेना मात्र अहिंसा नहीं है बल्कि किसी जरूरतमंद की सहायता करना भी अहिंसा धर्म है। आज उनकी जन्म जंयति पर सभी को उनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन में अपनाना चाहिये।_

श्री चंद्रसेन जैन (महामंत्री श्री महावीर जिनालय ट्रस्ट )

वैसे तो भगवान महावीर का पूरा जीवन ही एक संदेश है, लेकिन उन्होंनें जो मूल मंत्र दिया वह अंहिसा परमो धर्म का है, जियो और जीने दो का है। उन्होंने कहा कि हमें किसी भी रुप में किसी भी स्थिति में कभी भी हिंसा का मार्ग नहीं अपनाना चाहिये। जब वे अहिंसा की बात करते हैं तो यह सिर्फ मनुष्यों तक सीमित नहीं बल्कि समस्त प्राणियों के बारे में हैं।
श्री चौधरी अजित जैन (वरि. समाजसेवी जैन समाज)

प्रस्तुति- दिलीप जैन शिवपुरी

Durgesh Gupta

Chief Editor

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