पिता ने तो निर्दयता की हदें ही तोड़ दी, कोई अपने बच्चों को ऐसी बेरहमी से पीटता है क्या?

 

बच्चों के साथ मारपीट की घटना देखने के बाद बाल कल्याण समिति ने घटना स्थल फुकियाथड़ (जिला राजसमंद,त. देवगढ़) जाकर जायजा लिया। पीड़ित बच्चों से पूछताछ में पता चला कि-बच्चों के पिता चैन सिंह रावत अक्सर उनके साथ बेरहमी से मारपीट करता है। 5 साल के ललित सिंह रावत और साढ़े तीन साल की बेटी लाजवंति उर्फ पूजा ने बताया कि 28 जनवरी (रविवार) को दोपहर एक बजे उनके पिता चैन सिंह ने बेटे ललित सिंह को रस्सी से बांधकर लटकाया और बेरहमी से पिटाई की। इसी तरह बेटी पूजा को भी बेंत से पीटा। इस दौरान उनकी मां भी उन्हें नहीं बचाती थी। यह जानकारी भी समिति को वीडियो देखकर मिली।
यह रिपोर्ट बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष भावना पालीवाल, सदस्य राजेश देव, गजेंद्र सिंह चुंडावत ने थाने पर उपस्थित होकर दी।

वार्डपंच रह चुका है आरोपी, शराब ठेके पर सेल्समैन

– आरोपी चैनसिंह 2008 से 2012 तक विजयपुरा ग्राम पंचायत का वार्ड पंच रह चुका है। अभी वह फुकिया का थड़ गांव में शराब की दुकान का सेल्समैन है।

– आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने अभियुक्त पिता के खिलाफ धारा 323, 342, 308, 34 व जेजे एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। (बाल कल्याण समिति अध्यक्ष भावना पालीवाल ने चैन सिंह पुत्र मोती रावत और वन्ना सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करवाया!
जब चैन सिंह की पत्नी डोली से पूछा तो उसने भी यह बात कबूल की कि उसने बच्चों को कभी नहीं छुड़ाया। बच्चों की पिटाई का वीडियो चैन सिंह के छोटे भाई बन्ना सिंह ने बनाया।
बाल कल्याण समिति के सामने मां डाली ने कबूल किया- उसने बच्चों को कभी नहीं बचाया…

मां बोली, उन्हें पकड़ा तो आत्महत्या कर लूंगी
– पुलिस घटना की जानकारी मिलने पर आरोपी के घर पहुंची तो डालीदेवी ने पुलिसकर्मियों को वहां से चले जाने को कहा। पति चैनसिंह को पकड़ने पर उसने आत्महत्या करने की धमकी तक दी।

– पुलिस पति, पत्नी और बच्चों को थाने लाई तो वे किसी की तरफ से रिपोर्ट नहीं आई। बच्चों की मां का रुख देखकर बाल कल्याण समिति अध्यक्ष भावना पालीवाल, सदस्य गजेंद्र सिंह लसानी, राजेश दवे ने राज्य बाल आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी से बात की।

– मामले में कार्रवाई करवाने के लिए जिला बाल कल्याण समिति की तरफ से चैन सिंह पुत्र मोती रावत और उसके छोटे भाई वन्ना सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करवाया।
बाल कल्याण समिति ने इसलिए दर्ज कराया केस

– मामले में मां या परिवार के किसी व्यक्ति की तरफ से रिपोर्ट दर्ज होने पर कोर्ट में गवाह मुकर सकते थे या मामला कमजोर हो सकता था।

– इसी कारण बाल कल्याण समिति ने अपनी तरफ से इस मामले में रिपोर्ट दर्ज करवाई।

– बाल कल्याण समिति अध्यक्ष भावना पालीवाल ने बताया कि धारा 75 में किसी बालक के प्रति क्रूरता, दंड देने, हमला करता है। तीन साल की सजा व एक लाख रुपए जुर्माना हो सकता है।

राज्य बाल आयोग अध्यक्ष- बोलीं बच्चे तो फूल के समान होते हैं, इनके साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं
– राज्य बाल आयोग अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी ने इस मामले में चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बच्चे तो फूल की तरह होते हैं। उनके साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति नहीं हो इसके लिए अभिभावकों और बच्चों में आपसी सामंजस्य बैठाने की जरूरत है। बच्चों के साथ ऐसा करने वाले अभिभावकों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

दोनों बच्चे दादा को सौंपे

– बाल कल्याण समिति अध्यक्ष भावना पालीवाल, सदस्य गजेंद्र सिंह, राजेश दवे मौके पर पहुंचे।

– पालीवाल ने बताया कि बच्चों की मां का रुझान अपने पति को बचाने की तरफ ज्यादा सामने आया। ऐसे में बच्चों के उनके दादा मोती सिंह रावत को सौंप दिया है।

Durgesh Gupta

Chief Editor

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