भूख प्यास की सिद्दत के बाद भी मुकम्मल हुए पंद्रह रमजान*

*भूख प्यास की सिद्दत के बाद भी मुकम्मल हुए पंद्रह रमजान*
*आबिद बख्श खोड़*

पिछोर अनुविभग के अन्तर्गत आने बाले ग्राम खोड़ में मस्जिद व खोड़ कि मुस्लिम वस्ती का माहौल इन दिनो वेहद ही खुशगवार है। शायद हमारे वडो ने सच ही कहा है। कि अल्लाह बहुत ही बरकत बाला है। वो कब किसको किस चीज से नबाज दे ये उसके शिबा कोई नही जानता। क्योकि जिस प्रकार की गर्मी का मोसम चल रहा है। उसे देखते हुए भूखा प्यासा रहना तो दूर की बात है। यह तो सोचने में भी ऐसा लगता है। कि कही मौसम के चलते शरीर में पानी की कमी ना हो जाये और इस कारण से कहीं वीमार न हो जाये पर आस्था के चलते ईश्वर से जो शक्ती मिलती है। उसके आगे सारी तक्लीफे दूर होती नजर आती

इसी तरह इस्लाम धर्म को मानने वाले सभी लोग रमजान के माह के दौरान लोग इबादत करते हैं और रोजा रखते हैं इसी क्रम में जिले का छोटा सा गाव खोड़ के मुस्लिम समाज के लोग भी रोजा रखते हुए इबादत करते हैं जिससे अल्लाह उन्हें सब्र के साथ दूसरों की भूख प्यास का एहसास कराता है और दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार व दान करने का जज्बा पैदा करता है इसी कठिन इवादत का माहीने के करीब पंद्रह दिन गुजरने के वाद भी मस्जिद को देखते हुए कही नही लगता की यह वही लोग है जो दिन भर विना कुछ खाये पिये रहकर रोजा रखते है।

Durgesh Gupta

Chief Editor

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