विधानसभा में प्रश्र उठाने वाली विधायक को साधने में लगे नए-पुराने सीएमएचओ

*नियम विरूद्ध ढंग से हुई करोड़ों रूपयों की खरीदी का मामला विधानसभा में उछला*

*-विधानसभा में पूछे गए प्रश्र को दबाने की तैयारी में जुटा अमला*

*-विधानसभा में प्रश्र उठाने वाली विधायक को साधने में लगे नए-पुराने सीएमएचओ*

शिवपुरी
शिवपुरी के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से डॉ एम एस सागर की एकाएक हुई विदाई के पीछे सप्लाई घोटाले की सुगबुगाहट सामने आ रही है। करीब 4 करोड़ की धन खर्ची को लेकर करैरा की विधायक शकुंतला खटीक ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को विधानसभा में घेरने के उद्देश्य से इस मामले पर प्रश्न लगाकर सत्ताधारी दल की मुश्किलें बढ़ा दी।

माना जा रहा है कि इस मामले को लेकर ही आनन फानन में शिवपुरी के सीएमएचओ रहे डॉ. एमएस सागर को अचानक उनके पद से हटा दिया गया। जिला स्वास्थ्य समिति के अधीन शिवपुरी जिले में करीब 20 करोड़ सालाना का बजट खर्च होता है बताया जाता है कि शिवपुरी में एनएचएम के बजट को बिना किसी प्रक्रिया कोस अपनाए खर्च किया गया है,ग्रामीण केन्द्रों पर सुरक्षा,भोजन, अस्थाई निर्माण,अनुरक्षण,दवा खरीदी,सर्जिकल खरीदी सहित अन्य मदो में जमकर अनियमितता हुई है।

मप्र भण्डार क्रय नियमों को भी ताक पर रखकर इस बजट को जिस मनमाने तरीके से ठिकाने लगाया गया है उससे सरकार के भी कान खड़े हो गए है इसलिये सरकार ने विधानसभा में अपनी फजीहत से बचने के लिये डॉ सागर को अचानक शिवपुरी सीएमएचओ के पद से हटा दिया। सूत्रों की माने तो करैरा विधायक के प्रश्न को लेकर अब नए सीएमएचओ भी गोलमाल करने में जुटे है इस प्रश्न में विधायक ने 2016-17 में डॉ सागर के कार्यकाल हुई सभी खऱीदी ,की जानकारी मांगी है चूंकि शिवपुरी का सीएमएचओ ऑफिस बुरी तरह इन खरीदी में फंसा हुआ है

इसलिये जबाब बनाने की जगह इससे बचने का प्रयास किया जा रहा है सूत्र बताते है कि सीएमएचओ ऑफिस में पदस्थ एक विवादित बाबू जो कि वर्षो से इसी कार्यालय में जमा हुआ है। वह इस तानेबाने को अमलीजामा पहनाने की जुगत में लगा हुआ है। ताकि 29 जून तक जबाब भेजने की अवधि को निकाल दिया जाए,इस मामले को लेकर करैरा मेें पदस्थ एक चिकित्सक नए सीएमएचओ को लेकर करैरा विधायक के घर भी दस्तक दे आये ताकि विधानसभा जबाब विलंबित होने की दशा में वह विधानसभा में हंगामा न करें। सूत्रों का कहना तो यहां तक है

कि यहां हुई इस खरीदी में करैरा के इस चिकित्सक की भी अहम भूमिका है। इसलिए वह अपने सम्पर्को के माध्यम से विधायक को शांत कराने की जुगत में लगे हुए है। इतना ही नहीं रन्नौद में पद स्थापना होने के बाद जिला मुख्यालय पर सीएमएचओ ऑफिस में काम करने वाले एक डॉक्टर के द्वारा भी पुराने और नए सीएमएचओ को इस प्रश्न का जबाब न देने के लिये राजी करने का भरपूर प्रयास भी किया जा रहा है। इस मामले में अब देखना यह है कि नए सीएमएचओ किस हद तक अपने पूर्ववर्ती डॉ सागर को इस घोटाले से बचाने में उनके मददगार साबित होते है, फिलहाल तो इस प्रश्न का उत्तर संकलित किया जा रहा है यही जबाव देने की जमावट शिवपुरी के सीएमएचओ ऑफिस ने कर ली है।

*सागर का विवादों से रहा है पुराना नाता*
शिवपुरी जिले में सीएमएचओ के पद पर पदस्थ होने के बाद से डॉ. एमएस सागर का विवादों से गहरा नाता जुड़ गया था। इन्होंने शिवपुरी जिले में प्रभार ग्रहण करने के बाद, जिलेभर में संचालित झोलाछाप डॉक्टरों के यहां अपनी धमक बनाना शुरू कर दिया था। इस मामले में सैकड़ों नोटिस झोलाछाप डॉक्टरों को बांटे गए लेकिन कार्रवाई के नाम पर डॉक्टर सागर मुंह में दही जमाकर बैठ गए।

झोलाछाप डॉक्टरों पर नोटिस जारी कर कसे गए शिकंजे के मामले में भी सीएमएचओ कार्यालय पर लेनदेन के आरोप उछले थे। जहां तक कि जिला मुख्यालय पर विश्वास क्लीनिक के संचालक और इस छापामार दल के बीच विवाद हो गया था। इस विवाद में स्थिति यह बनी थी कि छापामार दल में शामिल लोगों को यहां से अपनी कार छोड़कर भागना पड़ा था। यह छापा रात के लगभग 10 बजे मारा गया था। इसके अलावा डॉ. सागर का विवाद जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. गोविंद सिंह से दबा छुपा नहीं है। बात-बात पर दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयास करने वाले डॉ. सागर का अस्पताल परिसर में सार्वजनिक तौर पर गोविंद सिंह से मुंहबाद हुआ था। इसके अलावा भी उनका एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह रन्नौद के एक प्रेस रिपोर्टर को धमका रहे थे। नियम विरूद्ध तरीके से की गई करोड़ों रूपयों की खरीदी का यह मामला अगर तूल पकड़ा तो डॉ. सागर पर गाज गिरना तय मानिए।

Durgesh Gupta

Chief Editor

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