सत्य से विमुख सज्जनों की दुर्दशा

व्ही.एस.भुल्ले
जब-जब सज्जन पुरुष सत्य से विमुख हुये है तब-तब उन्हें दुर्दशा का शिकार होना पड़ा फिर काल परिस्थिति जो भी रही हो। उन्हें ऐसी सभा, परिषदों में होने वाले शास्त्रार्थ में हमेशा लज्जित भी होना पड़ा और अपमानित भी, इसीलिये सज्जनों के बीच सत्य का ज्ञान होना अतिआवश्यक है। साथ ही सज्जनों को किसी भी सभा परिषद में शिरकत करने से पूर्व इस बात का भी आभास या ज्ञान होना आवश्यक है। कि आयोजित सभा का उद्देश्य और ध्यैय क्या है।

तभी सज्जन व्यक्ति अपनी सज्जनता की रक्षा कर, समाज, व्यक्ति को संरक्षित कर पायेगें क्योंकि समुची सृष्टि में जिस तरह सूर्य, चन्द्रमा, जन्म, मृत्यु कटु सच है। सच और जिस तरह से हमें हमारे महान मत, ग्रन्थ, वेद अनादिकाल से समस्त मानव जगत और सज्जनों को सचेत करते आये है कि हमारे अपनो के बीच से कोई स्वार्थी चोर, पापी हम सज्जनों का स्वामी न बन जाये।

कहते है प्राकृतिक सम्पदा को लूटने वाला चोर और सृष्टि का सन्तुलन खराब करने वाला पापी होता है। ऐसी स्थितियां सत्ता, सभा, परिषदों में ही नहीं, किसी भी समाज, वर्ग, संस्था, संगठन दल में भी हो सकती है।

इसीलिये सज्जनों को सृष्टि और समाजों को संरक्षण, मार्गदर्शन के लिये हमेशा सचेत सजग रहना चाहिए तभी हम अपने इस महान जीवन को सफल, सक्षम बना पायेेगें।

Durgesh Gupta

Chief Editor

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