समस्याओं से घिरा 33 वर्ष पुराना शासकीय सिंधिया महाविद्यालय

*?? संबाददाता :- राहुल शर्मा, इमरान अली*

*??समस्याओं से घिरा 33 वर्ष पुराना शासकीय सिंधिया महाविद्यालय*

*??विद्यार्थियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में 25 वर्षों से जमे कॉलेज प्रबंधन नाकाम*

कोलारस – साल बदला, तारीख बदली, तमाम अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि बदले, नहीं बदले तो महाविद्यालय में 25-25 वर्षों से कुंडली जमाकर डटे दोनों प्रोफेसर व महाविद्यालय की सूरत। जहां एक ओर उच्च शिक्षा को बढ़ावा देेने के लिए सरकार नए-नए कॉलेज खोल रही है वहीं तीन दसक पूर्व खुले शासकीय कॉलेज में रिक्त पदों की पूर्ति से लेकर अन्य व्यवस्थाएं बनाने में पूरी तरह से असफल सावित हो रही है। शासकीय महाविद्यालय कोलारस इसका जिता-जागता हुआ उदाहरण है जो 1985 से प्रारंभ हुआ लेकिन तभी से अब तक वहीं की वहीं खड़ा होकर अपनी दुर्दशा पर आंसु बहाता हुआ नजर आ रहा हैै। कॉलेज में अध्यनरत तीन सैकड़ा से अधिक छात्र-छात्राओं पर केवल तीन प्रोफेसर हैं, जिससे अन्य विषयों की पढ़ाई में विद्यार्थी पिछड़ रहे हैं, यही नहीं एक वर्ष से कॉलेज में पीने के पानी का संकट बना हुआ है लेकिन प्रबंधन का इस ओर ध्यान नहीं हैं। लाइवरेरी है लेकिन उसमें पुस्तकों व समाचार पत्र नहीं हैं, यहां खास बात यह है कि कॉलेज की समस्याओं को लेकर छात्र संघ द्वारा समय-समय पर प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर मंत्रियों को अवगत कराया गया लेकिन कॉलेज प्रबंधन द्वारा अपनी ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं जिससे कॉलेज कई समस्याओं से घिर गया है।
शासकीय सिंधिया महाविद्यालय एक लम्बे समय से स्टॉफ की कमी से जूझ रहा है। कॉलेज में 326 छात्र-छात्राएं अध्यनरत हैं लेकिन स्टॉफ के नाम पर मात्र इतिहास के प्रोफेसर आरएस ठाकुर हैं, इन्हीं पर प्रभारी प्राचार्य का प्रभार है, वायके राय राजनीति के प्रोफेसर हैं जो कॉलेज में छात्रों को बरगलाने की राजनीति ही ज्यादा कर रहे हैं, तीन अतिथि शिक्षक हैं जो सांठ-गांठ के चलते कभी-कभी ही महाविद्यालय आते हैं। शेष विषयों के पद खाली हैं, यहां तक कि लेखापाल का पद भी महिनों से रिक्त है। महाविद्यालय में कहने को लाइवरेरी रूम हैं लेकिन कागजों पर भले ही पुस्तकों से लेकर समाचार पत्र आ रहे हों परन्तु एक भी पुस्तक व अखबार लाइवरेरी में नहीं आते। इन दिनों बारिश में कॉलेज भवन की दीवारें जगह-जगह से चटक रही हैं, छतों से पानी टपक रहा है, छत से पानी की झड़ी लगने से कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं लेकिन दीवारों सहित छतों का मेंटीनेंस कराने के प्रति कॉलेज प्रबंधन गंभीर नजर नहीं आ रहा है। कॉलेज को खुले हुए 33 वर्ष हो गए और 25 वर्ष से तो प्रभारी प्राचार्य एवं प्रोफेसर वाईके राय कुंडली मारकर डटे हुए हैं लेकिन ऐसा लगता है कि समस्याओं से इन्हें कोई लेना-देना ही नहीं हैं यह दोनों तो केवल अपना समय पास करने में लगे हुए हैं। यही प्रमुख कारण हैं कि छात्रों को सुविधा उपलब्ध कराने में कॉलेज प्रबंधन पूरी तरह से नकारा सावित हो रहा है।

*वे अपने लिए पानी के कैंपर मंगाते हैं, छात्र क्या करें*

भू-जल स्तर नीचे चला जाने के कारण कॉलेज के बोर ने काम करना बंद कर दिया तभी से पेयजल की किल्लत पैदा हो गई है, छात्र संघ द्वारा पीने के पानी की समस्या को लेकर पूर्व में एसडीएम, सीएमओ से लेकर उप चुनाव के दौरान प्रभारी मंत्री, जल संसाधन मंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया गया लेकिन यह समस्या आज भी ज्यों की त्यों हैं। जहां तक कॉलेज प्रबंधन की बात है तो वह अपने लिए पानी के कैंपर मंगा लेते हैं लेकिन छात्र कहां से पानी मंगवाएं। खास बात यह है कि कॉलेज में इन दिनों सेमेस्टर की परीक्षाएं हो रही हैं लेकिन परीक्षाार्थियों को पानी की व्यवस्था नहीं करवाई जा रही है।

*पुरानों का हो स्थानांतर, नया स्टॉफ आए तब सुधरेंगी व्यवस्थाएंर – शर्मा*

भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि महाविद्यालय में प्रभारी प्राचार्य से लेकर सालों से पदस्थ प्रोफेसर का स्थानांतर हो और नया स्टॉफ पदस्थ किया जाए तभी कॉलेज की व्यवस्थाओं में सुधार हो सकता है, वर्तमान प्रबंधन छात्रों के लिए पीने के पानी की तक व्यवस्था नहीं कर सका, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अन्य व्यवस्थाओं का क्या हाल हो रहा होगा। इस संबंध में उच्च शिक्षा आयुक्त व उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर व्यवस्थाएं बनाए जाने की मांग करूंगा।

*विधानसभा में उठाऊंगा समस्याएं – विधायक*

कोलारस विधायक महेन्द्र सिंह यादव ने कहा कि सरकार नए कॉलेज तो खोल रही है, पुराने कॉलेज में स्टॉफ की व्यवस्था नहीं कर पा रही है, आखिर सरकार की यह क्या व्यवस्था है, आने वाले विधानसभा सत्र में कॉलेज की समस्याओं को प्रमुखता से रखूंगा। इसके अलावा प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री को भी पत्र लिखकर अवगत कराउंगा।

Durgesh Gupta

Chief Editor

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