स्कूल संचालकों के आगे जिला प्रशासन और परिवहन विभाग नतमस्तक

पालको की जेब पर डाका, 600 रुपये से 750 रुपये की स्कूल बसों की फ़ीस

बिना फिटनैस और बिना बीमा की कड़म बसों में सफर करने को मजबूर बच्चे, हादसों का जिम्मेदार कौन?

शिवपुरी-स्कूल संचालकों की मनमानी के चलते इस शिक्षण सत्र में पालको की जेब ढीली होने वाली है इनके द्वारा स्कूल बसों की फ़ीस 25% से 35% तक की वृद्धि की है, जिन बसों में बच्चे सफर कर रहे है वह लगभग सभी कड़म बसे है और उनकी फिटनेस और बीमा तक नही है।

600 रुपये से 750 रुपये की स्कूल बसों की फ़ीस

विगत वर्ष पालको से बस फ़ीस के नाम पर 600 रुपये वसूले जाते थे किंतु स्कूल संचालकों ने अपनी जेब भरने के चक्कर में बस की फीस 750 रुपये कर दी है।

कड़म बसों में सफ़र करने को मजबूर स्कूली बच्चे

स्कूलों के पास अधिकतर बसे कड़म है जिनकी ना तो फिटनेस है ना ही उनके बीमा है सभी बसे ओवरलोड चलाई जा रही है अगर इन बसों से कोई हादसा होता है तो जिम्मेदार कौन होगा ये सवाल सबसे बड़ा है।

पालक संघ भी नदारत

पालको की सुनवाई कही नही होती है कुछ पालक संघ के लोग अपना निजी स्वार्थ सिद्ध करने के लिए पहले तो आन्दोलन करते थे किंतु अपना स्वार्थ सिद्ध होने के उपरांत अब वह भी कही नजर नही आते है।

प्रशासन भी नतमस्तक

इन स्कूल संचालकों की मनमानी के आगे प्रशासन भी कुछ नहीं कर पाता है केवल पालको को संतुष्ठ करने के लिए दिखावे की कार्यवाही की जाती है और कोई भी नियम इन स्कूलों में शक्ति से लागू नही करवाया जाता है।

✍?के.के.दुबे✍?

Durgesh Gupta

Chief Editor

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