लड़की का दाह संस्कार होने के बाद ,एक दिन घर वापस आ गयी..Latest News

नोएडा सेक्टर-97 नयागांव के रहने वाले सर्वेश सक्सेना की बेटी 6 अप्रैल की सुबह घर से निकली, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी. परेशान सर्वेश और उनकी पत्नी राज ने फेज-टू थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई. Latest News 18 दिन बाद 24 अप्रैल को सर्वेश के पास एक फोन आया. ये फोन पुलिस का था. बताया गया कि सेक्टर 115 में नोएडा-गाजियाबाद हाईवे के पास बोरे में बंद एक लाश मिली है. लाश का चेहरा जला हुआ था और शरीर सड़ चुका था.

इस लाश को राज और सर्वेश ने अपनी बेटी नीतू की लाश बताया. अंतिम संस्कार भी कर दिया. पुलिस भी इसे हत्या मानकर जांच में जुट गई. मगर 30 अप्रैल को कुछ ऐसा हुआ जैसा सिर्फ फिल्मों में होता है. पुलिस को पता चला कि नीतू अभी जिंदा है. घर वालों को पता चला तो उनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई. वो खुश तो थे कि उनकी बेटी जिंदा है, मगर हैरत ये कि जिसका उन्होंने दाह संस्कार कर दिया, वो लड़की कौन थी.

ये था मामला-

नीतू की शादी सात साल पहले शाहजहांपुर के रामलखन से हुई थी. लेकिन दोनों में विवाद हो गया. तीन साल से नीतू अपने मायके में ही रह रही थी. नीतू जब गायब हुई तो उसके मायकेवालों ने पति और उसके घरवालों पर शक जताया. पुलिस ने रामलखन और उसके पिता रामकिशन को हिरासत में लेकर पूछताछ कर क्लीनचिट दे दी.

फिर नीतू का ‘शव’ बरामद हुआ तो पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच शुरू की. जांच में पता चला कि नीतू के पिता सर्वेश की परचून की दुकान है, जिसपर नीतू बैठा करती थी. पुलिस ने नीतू के परिवार वालों से किसी ग्राहक पर शक होने के बारे में पूछा. इस पर उन्होंने पड़ोस में रहने वाले पूरन का जिक्र किया, जो पिछले कुछ दिन से गायब था. पुलिस ने तलाश कर पूरन को हिरासत में लिया और पूछताछ की. लेकिन पुलिस को कुछ हाथ नहीं लगा.

उसी रात नीतू के परिवार वालों ने पूरन को अपना बोरिया-बिस्तर लेकर घर से भागते देखा तो पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने पूरन को फिर धर लिया. इस बार पुलिस ने डंडा चलाया तो पूरन का चूरन निकल गया. उसने सब उगल दिया. बताया कि नीतू उसके साथ ही यूपी के एटा में रह रही है. तुरंत पुलिस को एटा रवाना किया गया, मगर नीतू वहां से फुर्र हो चुकी थी. नोएडा के भंगेल इलाके में पहुंच गई थी. पुलिस को एक मुखबिर ने इसके बारे में सूचना दी और 30 अप्रैल को नीतू को बरामद कर लिया गया.

पूछताछ में नीतू ने बताया कि 5 अप्रैल को उसका घरवालों से विवाद हो गया था. नाराज होकर वो पूरन के साथ भागकर एटा पहुंच गई, लेकिन जब पूरन के जरिये अपनी हत्या और पुलिस जांच का पता लगा तो वो डर गई. फिर भंगेल पहुंच गई, जहां से उसे पकड़ लिया गया. 2 मई को पुलिस ने नीतू को उनके परिवार वालों को सौंप दिया.

बरामद शव को नीतू कैसे माना?

इस मामले में जो सबसे बड़ा सवाल है, वो है पुलिस की लापरवाही का. एक लड़की का शव बरामद होता है. शक के आधार पर एक परिवार को बुलाया जाता है. शिनाख्त के लिए. परिवार उसे अपनी बेटी बता देता है और पुलिस उसे शव सौंप देती है. सबसे पहले तो सवाल इसी शिनाख्त पर खड़े होते हैं कि सड़ चुके शव की इतनी आसानी से कैसे शिनाख्त हो गई. पुलिस ने क्यों नहीं उसका डीएनए जांच करवाई. साफ दिखता है कि पुलिस कैसे इस मामले से अपना पल्ला झाड़ना चाहती थी.

शिनाख्त के बारे में नीतू के पिता सर्वेश ने बताया कि उस शव की कद काठी और गले में लटका मंगलसूत्र उनकी बेटी से मिलता-जुलता था. इस वजह से उन्होंने इस शव की पहचान गलती से कर ली. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि पुलिस से डीएनए जांच की मांग की थी लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया. सवाल यही उठता है कि इस गलती की सजा किसे दी जानी चाहिए? पुलिस खाली जांच की बात कहकर कैसे बच सकती है.

Durgesh Gupta

Chief Editor

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