सरकार से नाराज संविदा कर्मियों ने फिर छेड़ा आंदोलन

भोपाल| चुनावी साल में हर वर्ग को साधने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है, लेकिन हर वर्ग के लिए बड़ी घोषणाएं करने के बाद भी हालात अभी पक्ष में दिखाई नहीं दे रहे हैं|

सरकार के लिए रूठों को मनाना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है| संविदा कर्मियों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया है| 34 विभागो के प्रदेश भर से आये संविदा कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राजधानी के नीलम पार्क में डेरा डाल लिया है|

नई संविदा नीति के विरोध में सरकार से नाराज संविदा कर्मी आज नीलम पार्क में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए हैं| दोपहर बाद सी एम हाउस और मंत्रालय घेरने की तैयारी है| 34 विभागों के करीबन एक लाख 84 हजार संविदा कर्मियों की सरकार से मांग है कि नियमित किया जाए, कई विभागों की बन्द हो चुकी परियोजनाओं से बाहर किये गए संविदा कर्मचारियों की भी बहाल किया जाए|

दरअसल, ‘संविदा व्यवस्था अन्यायपूर्ण व्यवस्था है और दिग्विजय काल में यह शुरू हुई थी, इसे ख़त्म कर दिया जाएगा’.. यह बात सीएम शिवराज ने कई मौके पर कही, जिसके बाद लगभग एक माह तक हड़ताल करने वाले संविदाकर्मियों को सरकार से उम्मीद बांध गई और उन्होंने अपनी हड़ताल वापस ले ली| लेकिन कैबिनेट तक इस प्रस्ताव को पहुँचने में देर लग गई|

कैबिनेट मीटिंग में उम्मीद थी कि संविदा कर्मचारियों को उन विभागों में जहां वो काम कर रहे हैं, नियमित कर्मचारी के तौर पर मर्ज कर दिया जाएगा। कहा गया था कि 29 मई को कैबिनेट में इसकी मंजूरी दे दी जाएगी परंतु ऐसा नहीं हुआ।

कैबिनेट में संविदा कर्मचारियों का मुद्दा आया। कुछ फैसले भी हुए परंतु नियमितीकरण नहीं हुआ। नाराज संविदा कर्मचारियों ने एक बार फिर विरोध के स्वर उग्र कर दिए हैं। अब सरकार के खिलाफ संविदाकर्मियों ने आर पार की लड़ाई का एलान किया है|

कैबिनेट ने अपने फैसले में संविदा कर्मियों को पद से ना हटाने, बिना जांच के बर्खास्त न करने, ईपीएफ कटौती, नियमितीकरण में 20% आरक्षण की पात्रता ,दूसरे विभागों में जाने की सुविधा, अवकाश सुविधा जैसी सुविधाएं देने का वादा किया है ।

लेकिन संविदा कर्मी इससे नाराज हो गए और सरकार का धोखा बताते हुए एक बार फिर आंदोलन शुरू कर दिया है| उनका कहना है कि सरकार के साथ बैठकर उनकी जो बात हुई थी उसमें सबसे प्रमुख मुद्दा, जिस पद पर वे काम कर रहे हैं, उस पद पर नियमितीकरण था। लेकिन सरकार ने यह वादा पूरा नहीं किया।

Durgesh Gupta

Chief Editor

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