सजायाफ्ता आसाराम को कैदी न.१३० का बिल्ला मिला ,वीआईपी ट्रीटमेंट खत्‍म, आश्रम का खाना बंद

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सजायाफ्ता आसाराम को कैदी न.१३० का बिल्ला मिला ,वीआईपी ट्रीटमेंट खत्‍म, आश्रम का खाना बंद

सजा के ऐलान के बाद आसाराम को फिलहाल जोधपुर जेल में रखने का निर्देश है. वहां उसे कैदी नंबर 130 का बिल्‍ला मिला है. फिलहाल आसाराम उसी बैरक में है, जहां अभी तक बंद था. फर्क इतना है कि अब अंडरट्रायल से कैदी नंबर 130 बन गया है. उसे यहां रहते पौने पांच साल हो गए. उसे अगस्‍त 2013 में गिरफ्तार किया गया था.

जोधपुर -आसाराम केस में फैसले के दौरान उसके समर्थकों के जोधपुर पहुंचने और किसी भी तरह के उत्पात मचाने की संभावनाओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही पुख्ता सुरक्षा इंतजाम कर लिए थे। इसके चलते जेल के आसपास एक समर्थक को छोड़कर कोई दूसरा पहुंच ही नहीं पाया।

सेंट्रल जेल की तरफ जाने वाले रास्ते पर गवर्नमेंट प्रेस के आगे ही पुलिस ने नाकाबंदी कर बैरिकेडिंग कर दी थी। इसी तरह, सोजती गेट नई सड़क से मोहनपुरा पुलिया की तरफ आने वाले आम यातायात को भी डायवर्ट किया गया था।

हालांकि, बालवाहिनी और क्षेत्र में रहने वाले लोगों के साथ-साथ इलाके में स्थित सरकारी महकमों में काम करने वाले कर्मचारियों को परिचय पत्र जांच के बाद जाने दिया गया।

उधर, जेल में कोर्ट की कार्रवाई शुरू होने के बाद कलेक्टर रवि कुमार सुरपुर और डीसीपी (ईस्ट) डॉ. अमनदीपसिंह कपूर भी सेंट्रल जेल पहुंचे। काफी देर तक रुकने के बाद कलेक्टर वहां से निकल गए, लेकिन डीसीपी डॉ. कपूर फैसला होने और इसके बाद न्यायाधीश, कोर्ट स्टाफ व सभी अधिवक्ताओं के वहां से निकलने के बाद तक रुके रहे।

जेल के बाहर एडीसीपी (ईस्ट) अनंत कुमार के साथ पुलिस अधिकारियों ने जिम्मा संभाला, वहीं एडीसीपी (मुख्यालय) कैलाशदान सांदू घुड़सवार टीम के साथ इलाके में लगातार गश्त करते रहे। सुबह सात बजे सेंट्रल जेल के बाहर से गवर्नमेंट प्रेस तक पुलिस का सख्त पहरा था।

पग-पग पर बैरिकेड्स और पुलिस के सशस्त्र जवान हर चुनौती व खतरे से निबटने के लिए पूरी तरह चौकस थे। मुख्य रोड से एक-एक करते मीडियाकर्मियों का कारवां जुटना शुरू हुआ तो दूसरी ओर पुलिस की मुस्तैदी बढ़ती गई।

 

वीआईपी ट्रीटमेंट खत्‍म, आश्रम का खाना बंद

आसाराम को अब तक आश्रम से आया खाना खाने को मिलता था लेकिन अब उसे जेल का भोजन दिया जा रहा है. जेल में आश्रम से भोजन लाने की अनुमति राजस्थान हाईकोर्ट ने दी थी. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. उसे जेल के कपड़ पहनने को दिए गए. बुधवार तक आसाराम के लिए बाहर से कपड़े आते थे. उम्र ज्‍यादा होने के कारण उसे बुजुर्ग श्रेणी में रखा गया है. आसाराम की उम्र अदालती दस्‍तावेजों के अनुसार 79 साल है.

बुजुर्ग कैदियों के लिए क्‍या है जेल का नियम

दैनिक भास्‍कर की खबर के अनुसार जेल अधिकारियों ने आसाराम को सजायाफ्ता कैदी की श्रेणी में रखा है. उस पर वे सभी नियम लागू हैं जो अन्‍य कैदियों के लिए हैं. उसकी उम्र को देखते हुए वह बुजुर्ग कैदियों के दायरे में आता है. जेल के नियमानुसार इतने बुजुर्ग कैदी से ज्‍यादा काम नहीं लिया जाता. उससे जेल में पेड़-पौधों में पानी डालने जैसा हल्‍का-फुलका काम ही कराया जाएगा. उसके साथ बंद सेवादार शरदचंद्र को कैदी नंबर 129 का बिल्‍ला दिया गया है. वहीं शिल्‍पी को कैदी नंबर 76 का बिल्‍ला मिला है.

आसाराम पर नाबालिग से रेप का था आरोप

आसाराम पर यूपी के शाहजहांपुर की एक नाबालिग से बलात्कार करने का आरोप था, जिसमें वह दोषी साबित हुआ. यह लड़की मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में आसाराम के आश्रम में पढ़ाई कर रही थी. पीड़िता का आरोप है कि आसाराम ने जोधपुर के निकट मनई आश्रम में उसे बुलाया था और 15 अगस्त 2013 को उसके साथ दुष्कर्म किया. आसाराम से इन आरोपों से इंकार किया था.

Durgesh Gupta

Chief Editor

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