नागरिकता संसोधन बिल: राज्यसभा में मोदी सरकार की अहम परीक्षा, विपक्ष ने कसी कमर – जाने क्या है नागरिकता संसोधन बिल (CAB) !

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सोमवार को लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल आसानी से पास हो चुका है. अब आज यह बिल राज्यसभा में पेश होगा. राज्यसभा की कार्यवाही की सूची के मुताबिक दोपहर 2 बजे इस बिल पर चर्चा शुरू होगी. राज्यसभा में इस बिल पर चर्चा की खातिर 6 घंटे का समय तय किया गया है. मोदी सरकार की असल परीक्षा तब होगी जब चर्चा के बाद बिल राज्यसभा में पारित किया जा रहा होगा. राज्यसभा में इस दौरान हंगामे की पूरी संभावना है क्योंकि बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस, टीएमसी और सपा ने भी अपने सांसदों को राज्यसभा में मौजूद रहने के लिए तीन लाइन व्हिप जारी किया है.

गौरतलब है कि नागरिक संशोधन बिल के पक्ष में जेडीयू, शिवसेना, बीजेडी और पूर्वोत्तर के कुछ दलों के साथ आने की वजह से लोकसभा में तो सरकार को इस बिल को पास कराने में कोई दिक्कत नहीं हुई. लेकिन शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यसभा में समर्थन देने के लिए शर्त रखकर फिलहाल सरकार की मुसीबत बढ़ा दी है. लेकिन अगर राज्यसभा का दलगत आंकड़ा देखें तो मोदी सरकार इसे यहां भी आसानी से पास करा सकती है.

121 वोटों की जरूरत

राज्यसभा में कुल सदस्य 245 हैं. लेकिन फिलहाल पांच सीटें रिक्त हैं. जिसके चलते राज्यसभा में कुल सदस्यों की संख्या 240 है. इसका मतलब यह है कि बिल के लिए अगर सदन के सभी सदस्य मतदान करें तो बहुमत के लिए 121 वोटों की जरूरत पड़ेगी.

बीजेपी के पास 127 वोट

राज्यसभा में नागरिक संशोधन बिल पास कराने के लिए मोदी सरकार को जितने सांसदों के वोट चाहिए उससे काफी ज्यादा संख्या में सांसद उनके पक्ष में वोट कर सकते हैं. आपको बता दें कि राज्यसभा में बीजेपी के 83, जेडीयू के 6, एआईएडीएमके के 11, बीजेडी के 7, एसएडी के 3, आरपीआई के 1, एलजेपी के 1, वाईएसआर कांग्रेस के 2, टीडीपी के 2, एजीपी के 1, बीपीएफ के 1, एनपीएफ के 1, एसडीएफ के 1, नॉमिनेटेड 3 सदस्य, निर्दलीय एवं अन्य 4 सदस्यों के साथ कुल 127 सांसद हैं जो बिल के पक्ष में वोट कर सकते हैं. लेकिन सरकार की तरफ के दो सांसद स्वास्थ्य कारणों की वजह से अनुपस्थित भी रह सकते हैं.

विपक्ष के पास हैं सिर्फ 113 वोट

वहीं जो दल इस बिल का विरोध कर रहे हैं राज्यसभा में उनकी कुल संख्या सिर्फ 113 ही है. बिल के विरोध में कांग्रेस के 46, टीएमसी के 13, एनसीपी के 4, सपा के 9, आप के 3, बसपा के 4, सीपीआई के 1, सीपीएम के 5, डीएमके के 5, आईयूएमएल के 1, पीडीपी के 2, जेडीएस के 1, केरल कांग्रेस एम के 1, एमडीएमके के 1, पीएमके के 1, आरजेडी के 4, शिवसेना के 3, टीआरएस के 6, 1 नॉमिनेटेड सदस्य और 2 निर्दलीय एवं अन्य के साथ कुल 113 सांसद हैं. उम्मीद की जा रही है कि विपक्ष के सभी सदस्य कल राज्यसभा में उपस्थित रह सकते हैं.

इस वजह से शिवसेना ने बदला फैसला

कांग्रेस के सूत्रों ने आजतक को बताया कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व शिवसेना द्वारा लोकसभा में बिल के पक्ष में वोट करने से खफा था. और इससे जुड़ा स्पष्ट संदेश महाराष्ट्र में हाल ही बने गठबंधन तक पहुंचा दिया गया था. इसी वजह से शिवसेना ने 24 घंटों के भीतर बिल पर अपना स्टैंड बदल लिया.

क्या है नागरिकता बिल (CAB)

नागरिकता संशोधन बिल (Citizen Amendment Bill) को गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्षियों के विरोध के बावजूद लोकसभा में सोमवार पेश किया और उसे पास कराया गया। इस पर करीब सात घंटे लंबी बहस चली।इससे पहले, भारतीय जनता पार्टी की तरफ से अपने सासदों को व्हीप भी जारी किया था। नागरिक संशोधन बिल कानून बन जाता है तो पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के चलते आए हिन्दू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को लोगों को सीएबी के तहत भारतीय नागरिकता मिल जाएगी।

ये है नागरिकता बिल के बारे में कुछ खास बातें

  • 1-नागरिक संशोधन बिल अगर कानून का रूप ले लेता जाता है तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों को CAB के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी।
  • नागरिकता संशोधन बिल के चलते जो विरोध की आवाज उठ रही है उसकी वजह ये है कि इस बिल के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी। कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसी आधार पर बिल का विरोध कर रही हैं।
  • देश के पूर्वोत्तर राज्यों में इस विधेयक का विरोध किया जा रहा है, और उनकी चिंता है कि पिछले कुछ दशकों में बांग्लादेश से बड़ी तादाद में आए हिन्दुओं को नागरिकता प्रदान की जा सकती है।
  • BJP की सहयोगी असम गण परिषद (AGP) ने वर्ष 2016 में लोकसभा में पारित किए जाते वक्त बिल का विरोध किया था, और सत्तासीन गठबंधन से अलग भी हो गई थी, लेकिन जब यह विधेयक निष्प्रभावी हो गया, AGP गठबंधन में लौट आई थी
  • माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि संसद में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पेश किए जाने पर पार्टी इसमें दो संशोधन लाएगी क्योंकि वह विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध करती है. येचुरी ने कहा कि पार्टी दो संशोधन ला कर उन सभी शर्तों को हटाने की मांग करेगी, जो धर्म को नागरिकता प्रदान करने का आधार बनाते हैं.
  • असम में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) के खिलाफ विभिन्न प्रकार से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिनमें नग्न होकर प्रदर्शन करना और तलवार लेकर प्रदर्शन करना भी शामिल है।
  • मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के चबुआ स्थित निवास और गुवाहाटी में वित्त मंत्री हिमंत बिस्व सरमा के घर के बाहर सीएबी विरोधी पोस्टर चिपकाए गए।
  • एनडीए की सहयोगी रही शिवसेना जो अब कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार चला रही है, इस बिल का समर्थन कर रही है। 
  • कांग्रेस-एनसीपी समेत कुछ विपक्षी पार्टियां इस बिल का विरोध कर रही है। विपक्षी पार्टियों को कहना कि धर्म के आधार पर देश को बांटने की कोशिश है।
  • शिवसेना के सांसद संजय राउत का कहना है कि महाराष्ट्र में सरकार अपनी जगह और देश के प्रति कमिटमेंट एक जगह है। इसलिए हम लोग इस बिल का समर्थन करेंगे।

Durgesh Gupta

Chief Editor

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