जानिए आखिर क्यों भारत के पीछे आ रहे इस्लामिक देश

 

चिराग गुप्ता ,

हाल ही में बांग्लादेश ने एक बेहद अहम पहल की है. उसने इस्लामिक देशों के संगठन आर्गेनाइजेनशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) में भारत को ‘पर्यवेक्षक राष्ट्र’ के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है.

बांग्लादेश का कहना है कि चूंकि भारत में मुसलमानों की आबादी खासी अधिक है, इसलिए उसे इस संगठन का सदस्य बनाया ही जाना चाहिए. इससे ओईसी के गैर-इस्लामिक संसार से मैत्रीपूर्ण संबंध बनेंगे. यह एक तथ्य है कि संसार में इंडोनेशिया के बाद सर्वाधिक मुसलमान भारत में ही हैं.

इसलिए यदि भारत को ओआईसी में पर्यवेक्षक राष्ट्र के रूप में शामिल किया जाता है, तो इसमें कोई बुराई भी नहीं है. भारत को इस प्रस्ताव को स्वीकार करने में भी कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए.

आखिर ओआईसी में एक को छोड़कर भारत के सभी सदस्यों से मधुर संबंध हैं. जिसे साथ भारत के कटु संबंध है, वो सिर्फ पाकिस्तान है. यह सबको भलीभांति पता है ही.

लाभ होगा ओआईसी को

मुस्लिम देशों के संगठन आर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोआपरेशन (ओआईसी) के 57 देश सदस्य हैं. भारत के ओआईसी से किसी भी रूप में जुड़ने से इसे लाभ ही होगा. दरअसल ओआईसी देशों में एक भी देश का धर्मनिरपेक्ष चरित्र नहीं है. सब एक से बढ़कर एक कट्टर इस्लामिक देश हैं.

अपने पड़ोस के पाकिस्तान को ही ले लीजिए. वहां पर गैर-मुसलमानों का कुछ सालों के बाद नामो-निशान भी नहीं रहने वाला. निश्चित रूप से इसमें भारत को शामिल किए जाने के बाद इस घोर इस्लामिक संगठन के भीतर लोकतंत्र की हल्की सी बयार तो बहने ही लगेगी. ये देश अधिक समावेशी होने की दिशा में बढ़ सकते हैं. ये भारत के मॉडल से सीख ले सकेंगे.

अभी तो इन सभी में गैर-मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है. उन्हें दूसरे दर्जे का मुसलमान माना जाता है. इनमें कुछ देश जो उदारवादी चरित्र के हैं जैसे इण्डोनेशिया और खाड़ी के कुछ देश, वे भी भारत के पीछे गोलबंद हो सकेंगे.

नहीं देते एक-दूसरे का साथ

हालांकि यह भी सच है कि ओआईसी का यह संगठन अब तक नकारा ही साबित हुआ है. ये संकट में भी एक-दूसरे के लिए कम ही खड़े होते हैं. अब रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने का ही मसला ले लें.

म्यांमार के सबसे करीबी पड़ोसी बांग्लादेश ने भी रोहिंग्या मुसलमानों को लेने से मना कर दिया. हालांकि कुछ तो चोरी-छिपे बांग्लादेश और भारत के भीतर घुस ही गए. बांग्लादेश कतई रोहिंग्या मुसलमानों को अपने यहां नहीं रखना चाहता है. बांग्लादेश के एक मंत्री मोहम्मद शहरयार ने तो खुलकर कहा है कि, ये रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं, हमारे यहां पूर्व में भी कई घटनाएं घट चुकी हैं.

यही कारण हैं कि हम उनको लेकर सावधान हैं. इस्लामिक देशों के अगुवा समझे जाने वाले सऊदी अरब और पाकिस्तान ने भी रोहिंग्या मुसलमानों को अपने यहां घुसने पर रोक लगा रखी है.

बेशक, दुनिया के हर कोने में होने वाली आतंकी घटना के लिए इस्लाम या उसके अनुयायियों को दोषी ठहराया जाने लगता है. बेशक, पूरी दुनिया में आतंकवाद नामक संक्रामक बीमारी के प्रसार के बाद से ही बार-बार आंतकवाद को इस्लाम से जोड़ा जाता रहा है. इस बात पर लंबे समय से बहस जारी रही है कि क्या आतंकवाद को किसी धर्म विशेष के साथ जोड़ना जायज है? इसके जवाब में लोगों का मानना रहा है कि ऐसा करना गलत है

और महज मुट्ठी भर राह से भटके लोगों की वजह से पूरे इस्लाम धर्म को दोषी ठहराना इस धर्म को कमतर करने की कोशिश है. पर अब चर्चित मुस्लिम साहित्यकार सलमान रश्दी ने कह कर नया विवाद खड़ा कर दिया है कि ‘इस्लामी आतंकवाद भी इस्लाम का एक रूप है और इसके खात्मे के लिए इस सच्चाई को स्वीकार करना जरूरी है.’

भारतीय मूल के प्रसिद्ध ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी कहते है कि ‘इस्लाम का हिंसक रूप भी इस्लाम ही है जो पिछले वर्षों के दौरान बहुत ही ताकतवर बनकर उभरा है

 

रुश्दी अपनी बेबाक राय के लिए हमेशा से ही कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे हैं और उनके उपन्यास ‘सैटनिक वर्सेज’ के लिए उनके खिलाफ ईरान ने उनके सिर कलम करने का फतवा तक जारी कर दिया था.

Durgesh Gupta

Chief Editor

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