21 हज़ार से कम सैलरी वाली प्राइवेट नौकरी करने वालों को मोदी सरकार का तोहफा

प्राइवेट नौकरी करने वालों को मोदी सरकार का तोहफा

प्राइवेट संस्थानों में काम कर रहे 3 करोड़ 60 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को. महीने में 21 हजार रुपए तक कमाने वाले कर्मचारियों की तनख्वाह अब बढ़ जाएगी. क्यों? क्योंकि उनकी सैलरी से अब बीमे का पैसा कम काटा जाएगा.

ये है फैसला

सरकार का एक डिपार्टमेंट है. नाम है कर्मचारी राज्य बीमा निगम. बोलचाल की भाषा में इसे ESI कहते हैं. इसका काम है प्राइवेट संस्थानों के कम सैलरी वाले कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा देना. अभी तक इस सहूलियत के बदले ESI में सैलरी का 6 फीसदी पैसा जाता था. इस 6 फीसदी में कंपनी का अंशदान 4.75 और कर्मचारी का हिस्सा 1.75 फीसदी का होता था. अब मोदी सरकार ने इसे घटा दिया है. कितना? सरकार ने इसे घटाकर 4 फीसदी कर दिया है.

अब कंपनी से 3.25 फीसदी और कर्मचारी से 0.75 परसेंट पैसा ही काटा जाएगा. जाहिर सी बात है, जब बीमा की कटौती कम होगी, तो कर्मचारियों की सैलरी बढ़ जाएगी. ये कटौती 22 साल में पहली बार की गई है. ये फैसला 1 जुलाई, 2019 से लागू होगा.

इतने कर्मचारियों को होगा फायदा

सरकार के इस फैसले से देश भर में प्राइवेट संस्थानों में काम कर रहे 3 करोड़ 60 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को फायदा मिलने का अनुमान है. फायदा कंपनियों को भी मिलेगा. अब उनको बीमे पर कम पैसा खर्च करना पड़ेगा. एक अनुमान के मुताबिक कंपनियों को साल में 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत होगी

कर्मचारियों के लिए इसलिए जरूरी है ये स्कीम –

हमारे देश में प्राइवेट संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए बहुत कम स्कीमें हैं. कर्मचारी राज्य बीमा देश की उन चंद स्कीमों में है, जिनसे कम आमदनी वाले कर्मचारियों को बड़ा सपोर्ट मिल जाता है. खुद के या परिवार में किसी सदस्य के बीमार होने की दशा में बेहद मामलूी पैसे में इलाज हो जाता है.

ये फायदे हैं इस स्कीम के

  • 1– कोई भी कर्मचारी छह महीने की नौकरी के बाद सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज करा सकते हैं.
  • 2- कर्मचारी के आश्रित यानी पत्नी, बेटा-बेटी या माता-पिता का भी इलाज होगा. बशर्ते उनकी महीने की आमदनी 9000 रुपए तक ही हो.
  • 3– किसी भी कर्मचारी के इलाज पर अभी ESI 87.5 फीसदी खर्च का भुगतान करता है. बाकी 12.5 फीसदी खर्च राज्य सरकार उठाती है.
  •  महिला कर्मचारी को 26 हफ्ते का मैटरनिटी लाभ मिलता है. मतलब ये कि महिला कर्मचारी को बिना ऑफिस गए पूरी तनख्वाह देने का प्रावधान है.
  • 5- कर्मचारी के विकलांग होने पर उसके कुल वेतन का 90 फीसदी रकम देने का प्रावधान है.
  • 6- कर्मचारी के बेरोजगार होने पर उसे नई नौकरी मिलने तक भत्ता दिया जाता है. नकद रकम उसके खाते में डाली जाती है

कौन से कर्मचारी हकदार हैं इस लाभ के?

ऐसे सभी संस्थान जिनके यहां 10 से 20 कर्मचारी काम करते हों, उनको ESI का लाभ मिल सकता है. जिन कर्मचारियों का वेतन 21 हजार रुपए तक है, वे इस स्कीम का फायदा उठा सकते हैं. 21 हजार रुपए से ज्यादा वेतन वाले कर्मचारी अपनी इच्छा से इस स्कीम में शामिल हो सकते हैं. कर्मचारी का लगभग फ्री इलाज होता है. नौकरी जाने पर बेरोजगारी भत्ता या पेंशन का भी प्रावधान है. इलाज के लिए ईएसआई कार्ड बनवाना पड़ता है. ईएसआई अस्पताल में हर तरह का इलाज कराया जा सकता है.

Durgesh Gupta

Chief Editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *